मेरे दोस्त~
दोस्त मेरे कई है मेरे दोस्त, तेरे अलावा भी है मेरे कुछ दोस्त,
कई हमदम कई सहारा है, उनके अलावा मैं उनका हूं दोस्त।।
अब तो लगता है जुदाई का सबब कुछ भी नहीं था मेरे दोस्त,
राह ताक़ते हैं कई दूर से ही कोई अच्छा कोई सुस्त है दोस्त।
कैसी है दुनिया इलाही मेरी, देखो जिसे नज़र लगता है दोस्त,
मेरे दोस्त ताकतवर और ज़हीन है, शख़्स वो
सब कुछ हो कर भी आलम ये जन्नत का फीका है मेरे-ए-दोस्त,
दुनिया बसे जिधर उससे दूर एक अपना जहां बसाना है दोस्त।
ये दिल इसलिए है मेरे दोस्त, की दिल में तू रह जाए मेरे दोस्त,
जब तुमसे बात ना हो ए-दोस्त, बन जाए हम दुश्मन-ए-दोस्त।।
इलाही/ilaahii/ اِلٰہی ;
मेरा ईश्वर, मेरा खुदा, ईश्वर, खुदा, परमेश्वर, भगवान, परमात्मा, अल्लाह को पुकारना, ए मेरे अल्लाह, ऐ ख़ुदा
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