न्याय कैसा~
मैं तमाशा सही लेकिन ये तमाशा कैसा,
फरेबी ज्यादा है इसमें क्या कसूर मेरा।
अंजाम अच्छा कहलाए और बदनाम बुरा,
भीड़ में हो रहा फैसला तो ये न्याय कैसा।
By~ Pradeep Yadav
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