सीखा और जो देखा✍️—

          अनुभव जो मैंने अकेले में है सीखा,
           उजाले में छल और कपट है देखा।

        उजाले में कोई ना कोई मिल ही जाएगा,
       इंतजार है उसका जो अंधेरे में साथ देगा।

       प्यार जो मैंने अपनों पर बेहिसाब बरसाया,
    प्यार के लती लोगो ने कही और ही घर बसाया।

        उम्मीद और भरोसा कभी गलत नहीं होते,
  इन्हें तोड़ जब तक अपने अपनों से जुड़ा नहीं होते।

   देखा है लोगो को अच्छा बनने का दिलवा करते हुए,
पास कुछ नही लेकिन बटोरा है खुद के हुस्न प्रदर्शनी से।

      खिलाड़ी होने का गुमान और खेल का परिणाम,
  तब तक हक में भी आता जब तब मेहनत नही करते।


                                        By~ Pradeep Yadav

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