कैसी महामारी है~

उठो प्रदीप, अपने चारो ओर देखो,
कहने को सवेरा, फैला अंधेरा चारो ओर।

चिड़ियों की चहक, मानो काली रात हो,
बीती रात को, वाहनों ने किया राज़ है।

पर्यावरण की बात करू या प्रजा की बात करू,
किन्ही की चुप्पी ने, किन्ही की लड़ाइयों में,
किसी ने मजबूरी में, किसकी की मंदबुद्धि ने,
आज अपने देश को कैसे बाट के बर्बाद कर दिया।

सबके हाथ है खाली, परिवार भी कइयों ने खो दिया,
कुछ ने नोट कमाने में, मुश्किल में सबको डाल दिया।

कैसे ये लोग हैं, कैसी इनकी मजबूरी है,
अंधेरा फैला है, चांद भी इन्होनें ख़रीद लिया।


 
                                     By~ Pradeep Yadav

Comments

Popular Posts