ये कलम का जोर है—

लहरों सा है ये मन मेरा,
कभी चंचल कभी शांत।

धैर्य और स्थिर है ये शरीर,
खूबसूरत है सबका चेहरा।

बचपन में ये बूढ़ा मन मेरा,
देख लिया सबका चेहरा।

ह्रदय और जुबां से मौन,
अब शब्दों में ताकत मेरे।

वक्त से पहले सब व्यर्थ है,
वक्त ही सबसे बड़ा न्यायधारी।


                  By~ Pradeep Yadav

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