बोझ

खुद खुदा ने भी नहीं बख्शा,
मेरा सफ़र फिर भी धूप का था,
टांगो में इतने छाले हुए की,
मैं खड़ा खुद के पैरों पे था।

सबने कहा कि सबको कष्ट है यहां,
लेकिन दिखाता सिर्फ कमजोर है,
मैंने लिख के दर्द बांटा क्योंकि,
हार का बोझ पहले से ही बहुत है।

                  By~ Pradeep Yadav

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