ताकत ✍️
जितने की चाहत है,
लिखना मेरी आदत है।
जीवन की परिभाषा है,बिन लिए कुछ जाना है।
ये विधि का विधान है,
खुदा से उपर नहीं इंसान है।
मैंने जिन्हेंं खुदा माना,
आज वो नही मेरे साथ है।
एक झलक उसकी,
अब पलकों पे वो है।
मेरी ताकत मुझमें,
मेरी मां से है।
By~ Pradeep Yadav
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