बीमार~

कर के सवाल मैं कई बार खुद से, खुद को कोसता हूं,
सांस मुझे ही नहीं आ रही या बाक़ी भी बीमार है यहां।

संघर्ष करके जीना सीख लिया सबने, आदत सी हो गई,
की कुछ बड़ा कैसे करें सबकी सोच जो सीमित रह गई।

दिखावे, दुनियादारी और पैसे में हम इतने उलझ गए,
की जब फोन से नजरें हटी तो आंखें खराब हो गई।

हंसाते, रुलाते और अपनी बातें रखते जैसे विद्वान हो गया,
और खुद के सवाल का जवाब देते-देते मैं बीमार हो गया।


                                         by— Pradeep Yadav

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