हार और जीत~

तू किसी को खोने से, क्यूं डरे, मौत से, सब यहां हैं डरे।
डर जो मुझ में है, औरों में है, चल इसे निकाल फेक, जीत ले।

तेरा जो ख्वाब है, अब तक अधूरा है, थोड़ा सांस ले, पूरा कर उसे,
डर जो आज है, कल जीत है, कल को भुला, अब कदम बढ़ा ले।

आज जो साथ है, कल सांप है, पास में, बस परिवार है।
डर को मार दे, तेरी जीत ही, तेरा अभिमान है, मान ले।

बांध ले गांठ तू, वरना हार है, जीत से पहले, अड़चनें हजार है,
डर से पहले हार है, उभर गया, तो जीत है, वरना हार है।


                                          By~ Pradeep Yadav

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