देश भक्ति

अब सिर्फ काबिलियत की ही नहीं,
जरूरत पड़ती है हरी पत्ती की भी।

गए थे चांद और मंगल पे भी गए हम,
प्रजातंत्र है बोल के बेच रहे देश को अब।

जिन्होंने जितने नोट उड़ाए है,
उनके उतने वोट आए है।

अब भी हमारी योजना बनती है बेईमानों से लड़ने की,
जरूरत पूरी होते ही भूल जाते हैं सारे देश भक्ति की।

कभी सैनिक कभी किसान को कर रहे हैं परेशान यहां,
आज का युवा बना कर मज़क कर रहा खुद का प्रचार।


                            By~ Pradeep Yadav

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