मचाएंगे~
ज़िंदगी बचपन मांगे, जिंदगी ना रुकना चाहे।
ये जिंदगी जीत चाहे, जिंदगी हार से सिखाना मांगे।
आखरी हार से उभरना चाहूं, व्हिस्की में पानी डालें।
पहचान खुद की बनाना चाहूं, नशे में अच्छी बातें।
गले में अपनी जान नहीं, कलम में जैसे एटम बम डालें।
जम्मू से कन्याकुमारी तक, अपना नाम अमर चाहूं मैं।
कलम से रैप लिख कर, हिप-हॉप पे रॉक करा दूं मैं।
हा हा, छोटे मूवी में भी, अपनी कलम से चाप छोड़ू मैं।
चल साइड दे गली गैंग हाइपर है, अपन भी टाइट है रे।
सब यहां राइडर-प्रोवाइडर है, मैं भी अपने गली का राइटर है रे।
फ्लो-फ्लो जैसे मैं सिंगल पसली, राइटिंग जैसे फाइटर असली।
कम आके तो बीट पे नचाएंगे, बम्बई-दिल्ली बहुत हो गया अब यूपी वाले भी मचाएंगे।
By~ Pradeep Yadav
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