मेरी ख़ामोशी मेरी सज़ा
बातों-बातों में दिन गुज़र गया,
तेरा साथ मन को कुछ यूं छू गया।
तेरे दिल में याद बनकर मैं रह गया,
रात को सिरहाने पे तेरी तस्वीर लेकर सो गया।
दोस्तों को पता चला तो खलबली मच गई,
दिल को दिल से मिलाने में दोस्ती निकल गई।
आंखों में झांकते ही,
जैसे ख़ामोशी मचल गई।
एक तरफ बचपन का यार था,
दुजी तरफ ज़िन्दगी भर का प्यार था।
मैं चुप रहा ये मेरी सज़ा बन गई,
दोनों से दूरी अब जिंदगी, मौत बन गई।
By— Pradeep Yadav
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