खत

अपने मंज़िल की ओर बढ़ चली हो,
की तुम्हे अब मै भी नहीं दिखूंगा।
ख़ुशी लिखूंगा खत में,
पर अपनी खुशियां नहीं लिखूंगा।
कल को अगर मैं फिर से जी जाऊं,
तो खत जरुर लिखूंगा।
अगर वक्त मिले मेरे लिए,
तो अपनी तस्वीर भी भेज दूंगा।
तू साथ बीते पलों का हिसाब चाहती थी,
तू मुझेसे मै नहीं जवाब चाहती थी।
अपने सवालों के हिसाब लगा रही थी,
एक मै था जो जुबान सी के बैठा था।
अब अगर मै जी जाऊं,
तो तुझे जरुर बताऊंगा।
अतीत में उतना ही जागूंगा,
जितना सेह पाऊं।
कि खत में बधाई लिखूंगा,
पर जो बाधाएं आई वो नहीं लिखूंगा।


                      By— Pradeep Yadav



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