माहिर हूं मै

अक्सर कम आंकते हैं मुझे लोग क्यूंकि मै साधारण हूं,
थोड़ी कविता और थोड़ा सी पढ़ाई में ही माहिर हूं मै।
कुछ लोगों की नजर में हवस का पुजारी हूं मै,
थोड़ा प्यार और थोड़ा ही झूठ बोलने में माहिर हूं।
अधिकतरों के हिसाब से अकारण हूं मै,
अक्सर कम आंकते हैं मुझे लोग इसी लिए माहिर हूं मै।




                                                By— Pradeep Yadav

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