मेरी अभिमान

वो समुंदर सी बसी है यादों में,
दृश्य छुपे हैं कई सारे इक किनारे पे।
कविताओं का है ऐलान हुआ,
सुन के कईयों का मन उदास हुआ।
होती है वो हरदम दिल के आस-पास,
सपना है या हकीकत बस उससे ही प्यार का एहसास हुआ।
ईश्वर है सबका सरकार,
जाना है सबको स्वर्ग यहां।
मेरी वो बुनियाद बनी,
सात जन्मों का अभिमान जहां।


                    By— Pradeep Yadav

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