खुद से कई बार मै सवाल करू

रात लिखूं या सुबह लिखूं,
आ आज कुछ सोते-जगते के ख़्वाब लिखूं।

जीत लिखूं या हार लिखूं,
आ आज कुछ अपने हाल लिखूं।

प्यार लिखूं या नफ़रत लिखूं,
आ आज उसका नाम लिखूं।

नज़दीकियां लिखूं या दूरियां लिखूं,
आ आज आसमां से ज़मीन तक की कमियां लिखूं।

झूठ लिखूं या हकीकत लिखूं,
आ आज इनके कुछ दुष्प्रभाव लिखूं।

दिल की बात लिखूं या रोज की बात लिखूं,
आ आज मोहब्बत का एक और पैगाम लिखूं।

इजहार लिखूं या इनकार लिखूं,
आ आज वो सारे राज लिखूं।

पढ़ाई लिखूं या दिलचस्पी लिखूं,
आ आज कुछ तनाव लिखूं।

ज़िन्दगी लिखूं या मौत लिखूं,
आ आज फिर से खुद को कैद करू।



                       By— Pradeep Yadav




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