अपनी सोच के कैदी हम~

कुछ तो सोच के वो दीवाना अपनी मां की आंचल में मर के जला होगा,
शायद ऐसे ही मरने में उसने जीने का अपना अलग ही मज़ा खोजा होगा।

हर जगह हम हंसते-हंसते आंसू सितम के बहा आते होंगे,
घर में तूफान से हाल हर शाम जाने क्या-क्या हुआ होगा।

हम कैदी हैं अपने विचारों के हमेशा सिर्फ खुद का ही सोचा होगा,
दीवाने से दीवाना तक शायद हर कोई अपने प्यार के लिए लड़ा होगा।

कि सबके अंदर एक अलग ही जहन्नुम भड़क रहा है सारे अड़े रहेंगे,
दिलों-दमाग के बंद खिड़की के यहां कैदी हजारों है मैं भी डटा रहूंगा।


                                               By~ Pradeep Yadav

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