नफ़रत~

एक हूर के खातिर मैं अपना नूर गवाया,
आईने में हमेशा किसी और को ही पाया,
रोता नहीं था जाने कैसे आखों से पानी आया,
इक तरफा प्यार ने मुझे सिर्फ नफरत दिलाया।


                                      By~ Pradeep Yadav

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