ये आखिरी है~
अब बात ये है कि कोई बात या कोई राज़ नहीं है,
कोई काग़ज नहीं है और न ही कोई बात छुपानी है।
अभी तो जवानी है रोज क़िस्से है कहानी है।
भूल जाता हूं यादों को प्यार हर बार मेरा आखिरी है,
खत लिख कर भूल जाना मेरी बगावत नहीं आदत है।
बाग़ी राहबर के हिकायत के जैसे मेरी शख्सियत है,
मुझपर सितम का किसको क्या पता सब कयामत है।
by~ Pradeep Yadav
राहबर راہْبَر ;
guide, conductor, leader, mentor
हिकायत حِکایَت ;
story, tale, narrative, narration, fable
बाग़ी باغی ;
traitor, insurgent
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