पिता और मैं~
मेरे मन का आधा दम आधा डर थे हमेशा पिताश्री,
मैं कभी साथ था कभी नहीं पर वो थे करीब कहीं।
मुझमें कुछ खूबियां थी उनकी कुछ उन्होंने निखरा है,
अन-बूझा सा मैं और उन्होंने सब बताया और सिखाया है।
मेहनत दिखे और सबके आखों से असर दिखे।
जीत-हार तै नहीं करता की कितने उस्ताद हो तुम,
सिस्का है घर की छत पे परिंदा भी पूरी रात भर।
रातभर जागा है एक पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए,
आब-ओ-हवा बदल गई साथ ही आज के सयाने बदल गए।
पिता ने जहाँ बसाया खाए जहां निवाले घराने बदल गए,
बेटे-बेटी बड़े होते-होते ज़माने बदल गए ठिकाने बदल गए।
By~ Pradeep Yadav
अन-बूझा
an-buujhaa اَنْ بُوجھ ;
जिसे समझ न हो, नादान, ना-समझ जो समझ में न आ सके
सिस्का سسکا ;
sobbed
आब-ओ-हवा آب و ہَوا ;
climate, environment
जहाँ;
World
ज़माने;
Time
सयाने;
Grown up, elders
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