शैतान~
इस जिस्म में सांसे कम है हम-साए में शैतान नज़र आए,
मैंने देखा था हरा सब अब जलता हुआ लाल नज़र आए।
जैसे पहले भी गुज़रा हूं यहां से साए चलते नज़र आए,
दहशत को पहचान जन्नत से लग़्ज़िश-ए-पा नज़र आए।
फ़िक्र-ए-फ़र्दा अब किसको है यहां सारे हरबे अपनाए,
अब खुदा भी क्या करता वो तो हमें इंसान थे बनाए।
ढाए है सितम हमनें खुद ये शैतान कहीं और से नहीं आए,
मेरे अंदर था जो वो मर गया अब सांस कहीं और से आए।
By~ Pradeep Yadav
हरबे harbe حربے ;
strategies, tactics
हम-साए
ham-saa.e ہم سایے ;
neighbour
लग़्ज़िश-ए-पा
laGzish-e-paa لَغْزِشِ پا ;
पाँव फिसलना, डगमगा जाना, विचलित हो जाना, पाँव की लड़खड़ाहट
फ़िक्र-ए-फ़र्दा
fikr-e-fardaa فِکْرِ فَرْدا ;
कल की चिंता, आने- वाले समय की फ़िक्र
Comments
Post a Comment