मैं हर दिन अपनी हार से उभरता हूं,
हर रोज जीत की खोज में निखरता हूं,
जिन्हें फ़िक्र है लगे मुंह पे दागों की,
ऐ दोस्त ये दिखावे के लोग ही बिखरते हैं।



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