भीतर सबके मन के जाने क्या-क्या चलता होगा,
    छांव में भी हर किसी का चेहरा जलता होगा,
    प्रेम की ज्वाला अंदर ही अंदर धधकती होगी,
चेहरा कुछ,और जुबां कोई और ही बात कहती होगी।

                                             By~ Pradeep Yadav

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