वबा~

हादसे में दबे मकान के तमाम पत्थर बिखरे हुए है,
सुब्ह के सारे उजाले रास्तों में निकल निखरे हुए है।
 
मैं अपनी खोज में कुछ इस तरह से बिखरा हुआ हूँ,
कि ये भी कह नहीं सकता की क्यूं मैं लिखने लगा हूं।

मुहीत तो अमीरों का है फ़ुज़ूल क्यूं कोशिश कर रहा हूं,
जहाँ पहुँच क़दम डगमगाए वहीं से जुस्तुजू शुरू कर रहा हूं।

मैं संभल गया तो ये मेरे शहर का इक और हादिसा होगा,
बज़्म अल्फाजों के बांध रहा जाने इससे अच्छा क्या होगा।

हिफाजत अपनों की नहीं कर पाया ये दीवारे साकित लग रही है,
तू हवाओं को भी बेच के क्या पाया बस बद-दुआएं बढ़ रही है।

दिल-ए-दर्द-आश्ना कितने ज़ीनत से बयां कर रहा हूं,
नाव मेरी किनारे पे डूब रही है और मैं भीड़ को ताक रहा हूं।



                                                             By~ Pradeep Yadav



वबा~
Epidemic
महामरी

मुहीत~
encircling, surrounding, circumference
आच्छादित, छाया हुआ, व्यापक, फैला हुआ, नदी, दरया।

जुस्तुजू~
search/ quest/ pursuit
आकांक्षा, इच्छा, तलाश, खोज

बज़्म~ assembly, meeting

दिल-ए-दर्द-आश्ना~
pain-knowing heart

ज़ीनत~
beauty/ elegance
शृंगार, सज्जा, सजावट, शोभा, श्री, रौनक़

साकित~
at rest, static
मौन, चुप, खामोश


                               

Comments

  1. This has too deep to write any word in its appreciation.
    I am totally speechless and touched by it .😌❤️🌼
    One of my favourite....

    ReplyDelete
    Replies
    1. So sweet of you ma'am, thenk you for your kind words.... Means a lot to me ❤️

      Delete

Post a Comment

Popular Posts