पाप-पुण्य~
ये बादल जब गरजता है तो मानो जैसे कहर बरसाएगा,
जो सोचते हो पुण्य किए हो ठहर जाओ घड़ा भर जाएगा,
ये बिगड़ता मौसम किसी एक के साथ नही रुकेगा,
पाप-पुण्य की रेखा छोटी होती ये पैसों से नहीं बढ़ेगा।
ये जो भगवान को सब मानते हो तो उनकी बातें कौन मानेगा,
अरे, सच तो बोल नही पाते तो धरती से प्यार कोई ख़ाख सिखाएगा।
By~ Pradeep Yadav
By~ Pradeep Yadav
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