लिखता हूं~
मुंह से मेरे फूल नहीं झड़ते है,
लिखता हूं तो सुर नहीं बनते है।
काश मैं दिल की ना लिखता कभी,
तो कवि आज लोग ना कहते मुझे।
संचित पीड़ा दूर हो खुद का ज्ञान खुद पे लगता नहीं,
नभ करता हूं फिर भी मन मेरा शांत होता नहीं।
निर्मल ह्रदय है मेरा कभी छल नही करता हूं,
जो ह्रदय में है वहीं पन्नों पर उतार रख देता हूं।
By~ Pradeep yadav
नभ' के कई अर्थ हैं जैसे- आकाश, व्योम, अंतरिक्ष, जल, वर्षा, मेघ या बादल।
संचित, जिसका एक अर्थ है- इकट्ठा या जमा किया हुआ।
निर्मल का अर्थ होता है- पवित्र या जिसमें किसी प्रकार की मलिनता न हो।
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