झूठा शायर~

हां ये सच है की झूठा शायर हु, झूठा लेखक हु,
हां, मैं झूठा कवि हु, मैंने अभी मेहनत कहां की,
हां, ये सच है मेरे दोस्त मैंने मोहब्बत नहीं की।

मेरे लिखने का दौर अभी चल रहा है,
मैंने खुद को नहीं जाना अभी,
तुम्हें क्यूं शायर दिख रहा है।

क्या पता मैं कितना काबिल हु,
मैं सीख रहा और इतना ही माहिर हूं।

हां, मैं झूठा शायर हूं।


                By~ Pradeep Yadav

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