जिक्र उसका~
मैंने कविताओं में उसका जिक्र इतनी बार कर दिया की,
चाहूं भूलना तो कैसे अपनी कविता ही पढ़ कर उसको याद कर लिया।
नफरत पे लिखने बैठा तो उस में भी उसके प्यार का वार लिख दिया,
चाहूं भूलना तो कैसे बिछड़ कर उससे अब मैं लिखना जो सीख गया।
By~ Pradeep yadav
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