इक जिंदगी इतनी भी बर्बाद नहीं किया करते,
प्यार में संभलने वाले दोबारा नहीं गिरा करते।
चाहे सादगी आए या आए हुस्न की मलिका अब,
कुछ भी कर सकते है अब आए प्यार के सिवा सब।
अपने वजूद पर सदा उठाता हूं उंगलियां मैं,
नशा तक मैंने छोड़ दिया है उसके प्यार में।
जिनके लिए महफिल सजाए जिनको अहमियत बताए,
ये इक दिन थम जाएगा शहर गांव हो जाएगा।
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