इस अनजाने सफ़र में कई लोग आए,
कुछ साथ चले कुछ रुक उतर गए,
कुछ संभल गए कुछ मेरे साथ भटक रहे,
इस शीशे में ना जाने क्यूं ये वहम है।


                            By~ Pradeep Yadav

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