मामूली शख्स हूं
मैं तेरे काबिल नहीं, मैं तेरे लायक नहीं।
मैं एक शख्स हूं, मामूली सा,
अपने ख्वाबों में भी मैं नायक नहीं।
मैं कोई नेता नहीं, जो तेरे हर मुश्किल का समाधान ढूंढू।
मैं कोई आशिक नहीं, जो तेरे जिंदगी में रंग भर दूं।
ना तू बेवफा है, ना मैं बेवफा हूं, ये दुनिया बेवफा है,
ये बात तो सिर्फ मुझे पता है।
ना तू गलत, ना मैं सही, यह तो बस मजबूरी है,
कि आज हम दोनों में दूरी है।
ना मैं गुजरा जमाना हूं, ना वो बीता हुआ कल है।
हां, हैं मुझ में हजारों कमियां, अब मै तेरे मर्ज़ की दवा नहीं।
ना हुआ मैं तेरा आसमां, ना तू मेरी ज़मीन हुई।
ख्वाब में हुए थे तेरे, अब असल में गुनहगार हुए।
तुम फूल मैं कांटा, तुम खुशी मै दर्द।
तुम्हें पाने की कोशिश में, बर्बाद हुआ ये दिल।
मैं दौर तुम जहां, मै बिगड़ा तुम गोरा काग़ज़।
मै कभी अजीब तो कभी अच्छा हूं,
मैं शराब, मैं खराब, मै नशेड़ी, मै बर्बाद।
मै हूं एक शक्स मामूली सा, तुम अपने जहां की बुलंदी हो,
मै तुम्हारे लायक तो नहीं पर दिल में अब मेरे भी जगह नहीं।
By— Pradeep Yadav
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