क्यूं भगवान?

जिसका मिलना मेरे किस्मत में ही नहीं था
उससे तुमने मुझे मिलवाया ही क्यों?
अगर हर मोहब्बत का अंत जुदा करके ही करना था तो
मोहब्बत जैसा कुछ बनाया ही क्यूं?


                           By— prawontgodeep, Poetry

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