सैनिक

मैं कल भी था, आज भी हूं।
फिर गम में डूबे, शहरी क्यूं।
सब कल भी राय देते थे, आज भी मशवरा दे रहे।
फिर सुकून नहीं, सभी को क्यूं।
सब जीते हैं अपने लिए और हम मर जाते हैं बिना अपनों को देखे।
सब मोहब्बत खोजते हैं जीने के लिए और हम मौका ढूंढते हैं हम वतन के सुरक्षा के लिए।
सब फायदा देखते हैं हमारी जिंदगी जीने के लिए,
कोई तो आए अपने देश को ज़िंदा रखने के लिए।
कभी ठंड में ठिठुर के देख लेना,
तो कभी तेज धूप में जल के देख लेना,
मौका मिले तो कभी घर वालों के बिना चल के देख लेना।।


                              By— Pradeep Yadav
                               

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