अभी जरा वक़्त है,
उजाले की भोर थी अंधेरा तो आने दो
अकेले रहने की आदत कहां है!
थोड़ा वक़्त दूर रह के तो देख लो,
मोहब्बत का पाठ पढ़ाने आए हो जरा आशिक को तो पहचान लो।


                          By— Pradeep Yadav

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