वह चाहत बहुत दूर दिखने लगी थी,
वह जिंदगी नहीं मौत की चाहत थी।
जो मैंने तेरे बिना अपने लिए सोची थी,
तुझे आजाद करके मैंने खुद के लिए एक चाल चली थी।


                                By— Pradeep Yadav

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