भेदभाव

बदनामी के डर से औरत जुल्म क्यूं सहे?
भेदभाव का खेल न जाने, हर जगह क क्यूं है चले।
इंसान को पत्थर और पत्थर को भगवान बना,
न जाने इंसान इसे क्यूं पुन्य है कहे?


                           By— Pradeep Yadav

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