एक है~

ये मंजिल भी है कुछ जानी पहचानी सी,
ये आसमां भी सारा और सबका एक है,
मैं भी खड़ा हूं धरती के किसी कोने पे,
और ये हवा भी किसी कोने से आई हुई है।


मैं जान रहा हूं सब की शक्ल,
कुछ कुछ चीजें लगभग एक हैं,
मेरे शरीर पर मेरे लिए हुए ही जख्म है,
वरना यह धरती एक है और हम एक हैं।



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