आखिरी सांझ—

खुशियों की गूंज में काफी दूर से होकर निकल गया मैं,
अपने खास लोगो से कुछ इस कदर बिछड़ गया मैं।

आखिरी सांझ में भी हम चुप्पियां साधे दूर होकर बैठे थे,
आजा की मुलाकात हो और कुछ मस्तियाँ याद करते हैं।

न जाने दोस्ती करके अब तक कितना निभा सका हूं,
ख़्याल रखना था जब क्या तब मैं काम आ सका हूं।

प्यार बहुत था और कुछ नोक झोंक की कहानियां थीं,
कोई दिन ऐसा नहीं था जिसमे एक दूसरे से दूरियां थी।

कांटों में चल रही जिंदगी कभी तुम लोगों संग खुशियां थी,
मौज मस्ती और ढेर सारी बातें जिनके बिना ख़ामोशी है।

अब गम की बातें न करना और न ही हार जीत की बात,
हम मिलेंगे तब जा के कहीं होगा इस दोस्ती का इंसाफ़।

की अभी तो जीना बाकी है और मरना भी अभी बाकी है,
खेल नही हुआ खत्म मेरे दोस्त अभी तो मिलना बाकी है।

आजा की आखरी सांझ में भी तो चुप्पियां साधे बैठे थे,
आजा की मुलाकात हो और कुछ मस्ती साथ करते है।


                                           By~ Pradeep Yadav

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