ग़ैर हो गया~
चलो बांट ले गई पहले मुझे ग़ैर अब घर से हो गया,
जाते-जाते उससे मेरे ना मरने का वादा भी हो गया।
रुक जाता थोड़ा और तो ज़ाहिरी से मुदारात भी गया,
दूरी हुई तो दुआओं का मेरा आईना चूर-चूर हो गया।
कैसे मुस्कुराता अब ये क़तरा दुख का जिंदगी हो गया,
लिए फिरता था मोहब्बत का सपना और ग़ैर हो गया।
जहाँ में सूरज उगा करता था वही घर खंडहर हो गया,
जरूरी था जीना मेरा इसलिए लिखना जरूरी हो गया।
सफ़र में उसके पीछे था नक़्श-ए-पा भी कोई मिटा गया,
सम्त-ए-मंज़िल पे मुड़ा तो पता चला ग़ैर जरूरी हो गया।
By~ Pradeep Yadav
zaahirii;
ज़ाहिरी ظاہِری
Arabic ; Adjective
external, outward, phoney, apparent
mudaaraat;
मुदारात مدارات
politeness, courtesy, hospitality
नक़्श-ए-पा نَقْشِ پا;
Arabic, Persian ; Masculine
footprints, footsteps
samt-e-manzil;
सम्त-ए-मंज़िल سمت منزل
direction of destination/goal
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