साहिल~
कभी जो मोहब्बत लिखता हूं तो उसको याद करता हूं,
कभी जो नफरत लिखता हूं तो बीती बात याद करता हूं।
बुरा दिन नहीं होता हर दम बुरा कुछ मैं भी हो गया हूं,
ये ज़ीस्त और भी निखेरेगी प्यार से जो दूर हो गया हूं।
अब मोहब्बत मुझसे करने वाली खामखां रूठ जाएगी,
गर गुज़र गई कोई करीब से तो सैल-ए-हवा ले जायेगी।
भरोसा पहले ही चला गया था फिर डर भी मेरा ले गया,
जाते-जाते प्यार में डूबने वाले साहिल से किनारा हो गया।
By~ Pradeep Yadav
ziist;
ज़ीस्त زِیسْت
Persian ; Noun, Feminine, Singular
life, existence
living
gar;
गर گر
if, in the event of
sail-e-havaa;
सैल-ए-हवा سیل ہوا
torrent/current of wind
taqaaza;
तक़ाज़ा تَقاضَہ
Arabic ; Noun, Masculine
demand, pressing settlement, urge, demanding payment, urgency, pressing settlement of a claim
saahil;
साहिल ساحِل
Arabic ; Noun, Masculine
beach, shore, coast
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