ग़ुल ग़ज़लें धुआं कर जाती है~

अक्सर मेरी नजरें खुद की ग़ज़लो पर पड़ जाती हैं,
खुशबू वाले फूलों से ग़ुल ग़ज़लें धुआं कर जाती है।

योद्धाओं की तुलना हमेशा उनके पिता से की जाती है,
मैं कैसा बेटा हूं जिससे उसकी मां की सेवा की जाती है।

सभी कहते हैं कि तुम्हारी शक्ल अपने पिता पे जाती है,
मैं मेहनत करता हूं तो क्यो शाबाशी नस्ल को दी जाती है।

मैं जितना ग़ौर करता हूं उतना निस्बत मुसीबत हो जाती है,
मालूम है यहा दिल की क़द्र-ओ-क़ीमत तय की जाती है।

रोज़ मुझसे मेरी ज़ंजीर खुशी-खुशी और कसी जाती है,
जुनूँ से मेरे मेहर-ओ-महताब की चमक बिगड़ जाती है।


                                         By— Pradeep Yadav



Gul;
ग़ुलغل
noise, tumult

qadr-o-qiimat;
क़द्र-ओ-क़ीमत قَدْر و قِیمَت
Noun, Feminine
value, worth

nisbat;
निस्बत نِسبَت
Arabic ; Noun, Feminine
betrothal, engagement
comparison

ibaadat;
इबादत عِبادَت
Arabic ; Noun, Masculine, Singular
devotion, adoration
prayer, worship, religious service

mehr-o-mahtaab
मेहर-ओ-महताब مہر و مہتاب
sun and moon

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