आखिरी हो~
यार ये लंबा वक्त अब मेरा आखरी,आखरी हो,
जरा इश्क़ को दूर से निभाना भी, लाज़मी हो।
ये दिल चाहता है इक और बार मिले, मुझसे वो,
मिलने के बाद की सज़ा जबकि, जानता है वो।
अब मेरे जाने के बाद ही तुम्हारा मुझे, ढूंढना हो,
पेड़ कब तक हरा रहेगा वहां जहां, पानी ना हो।
वो खुदकुशी के मिजाज़ की है जरा, की दूरी हो,
उम्मीद उससे है कभी जुदा ना हो, की रोशनी हो।
क़िस्सा-ए-दर्द का दौर हो या हो दूरी, या चाहत हो,
रौशनी जाते-जाते आग लगा देती है, जैसे शराब हो।
By~ Pradeep Yadav
laasha
लाशा لاشَہ
Persian ; Noun, Masculine
dead body
qissa-e-dard
क़िस्सा-ए-दर्द قصۂ درد
story of pain
kaif-parvar
कैफ़-परवर کیف پرور
increasing pleasure
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