कल और आज

रात थी, सुबह हो गई
रेत थी, पानी में बह गई।
लोगों ने वक्त आने पे ऐसा साथ छोड़ा,
कि दुश्मनों से भी दोस्ती हो गई।
खुश था, दुखी हो गया
भोला था, हरामि हो गया।
इश्क ने ऐसा लूटा की,
ये आदमी भी आज नंगा हो गया।
धूप थी, छांव हो गई
कल की ही बात थी,
आज नई कहानी हो गई।
लोगों ने अपना मतलब देख शहर बसाया,
आज पेड़ की छांव ने सबको अपनी गलती का एहसास कराया।


                                  By— Pradeep Yadav

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