यहां भी और वहां भी
इंसान में इंसानियत,
यहां भी है वहां भी है।
इंसान में हैवानियत,
यहां भी है वहां भी है।
भगवान यहां भी हैं,
अल्लाह वहां भी हैं।
इंसानों के भेष में दरिंदे,
यहां भी है वहां भी है।
पेड़ के नीचे छांव और सुकून,
यहां भी है वहां भी है।
शहर के भागदौड़ से लेकर खेल के मैदानों तक का संघर्ष,
यहां भी है वहां भी है।
आसमां के नीचे और जमीन के ऊपर परिवार,
यहां भी है वहां भी है।
मोहब्बत दिल में,
यहां भी है वहां भी।
कोई सरकार से परेशान तो कोई लोगों की सोच से और तकलीफ,
यहां भी है वहां भी है।
दीवार है बीच में,
यहां भी है वहां भी है।
देश के लिए कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना,
यहां भी है वहां भी है।
लड़ाई से नहीं शांति से रहना चाहते हैं लोग,
यहां भी और वहां भी।
By— Pradeep Yadav
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