चाहता हूं
बिन मंजिल, बिन तेरे,
एक जिंदगी जीना चाहता हूं।
कहीं दूर किसी सन्नाटे वाली जगह पे,
ठहरी हुई आवाज होना चाहता हूं।
एक शरीर होना चाहता हूं,
बिना दिमाग और दिल का होना चाहता हूं।
हंसी और खुशी नहीं चाहता हूं,
सुकून से बस तारे देखना चाहता हूं।
यह दुनिया बहुत खूबसूरत है,
इस सफर में अकेला ही चलना चाहता हूं।
दूर आसमान में, बनते हुए इंद्रधनुष में,
ही कहीं खोना चाहता हूं।
मैं अभी "मैं" नहीं हूं,
अब बनना चाहता हूं।
औरों से दूर एक जिंदगी चाहता हूं,
हां, मैं अब अकेला ही चलना चाहता हूं।
By— Pradeep Yadav
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