बताऊं क्या?
छोटा सा दिया हूं
जल्दी बुझ जाऊं तो क्या!
अंधेरे में चलने की आदत है
उजाला कितना दूर है उससे मुझे क्या?
आसमां में होते हैं यूं
तो अनगिनत तारे,
गिनता है इंसान जमीन से
कभी उनको क्या?
दिल में जिसके लिए
प्यार कम नहीं हुआ कभी,
आज याद ना करूं
तो भूल गया क्या?
सालों जिसके साथ बिताए
आज यूं ही चला जाऊं दूर,
मोहब्बत नहीं है
तो मजाक है क्या?
कोई रूठा तो कोई खुश है
कोई मोहब्बत तो कोई जिना सीखा रहा है,
जिसने अमिट सी राहों पर दो कदम भी ना चले हो
वो आज हमें लिखना सीखा रहे हैं!
चेहरे पर मुस्कान है
आंखों में आंसू छुपा रखा हूं
तन्हा हूं, घायल हूं,
दिल टूटा, दिमाग नहीं चल रहा है,
हाल-ए-ज़िन्दगी अब तुम्हें
इससे अच्छे से बताऊं क्या?
By— Pradeep Yadav
Comments
Post a Comment