सफर–२

तू आगे बढ़ता जा,
लोग क्या बोलेंगे छोड़ तू अपना रास्ता बुनता जा।
तू लोगों के साथ ना चल,
है हिम्मत और हौसला तो अपने काम से औरों को साबित कर।
कौन कहता है खुदा तुझसे खफा है या किस्मत तेरे लकीरों में नहीं है,
चल मान लिया लोग तेरे खिलाफ हैं पर कलम तो तेरे साथ है,
बना अपना इतिहास तेरा दिल तो तेरे पास है।
कभी तू लोगों का साथ ढूंढता था,
तो कभी अपनी किस्मत को कोसता था।
मंजिल तेरे सामने होती थी,
फिर क्यों तू लोगों का इंतजार करता था।
करता हिम्मत तो आज मंजिल तेरे कदमों में,
और पहचान बुलंदियों को छू रही होती।
नजरों में मंजिल और दिल में देश के लिए कुछ करने का जुनून था, आंधियों ने भी कोशिश की, 
लेकिन मै अपना दिल अंगारे में लिए चल रहा था।


                                          by— Pradeep Yadav

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