हनुमान हूं
रामायण का हनुमान हूं,
आकाश में उड़ता हुआ विमान हूं।
तुम क्या मुझसे सिखाओगे,
मै खुद एक पहचान हूं।
मैं वो बाढ़ हूं, जो चिर दे पत्थर को,
मुझे हल्के में मत लेना, मेरी पहले फैन फॉलोइंग देख लेना।
अभी तो बहुत प्यार से सुनाया हूं,
जैसे घाव पे मलहम लगाया हूं।
याद रखना नाम ये चाहे गुजर जाए शाम बे,
मै वहीं से आगे अपने दम पे बढ़ा जहां से तू मुकर गया बेनाम के।
मै तेरा हनुमान हे!
मुझे तू पहचान ले।
By— Pradeep Yadav
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