एक कहानी— कोई कुछ तो कहेगा!

सुन तू मेरी एक कहानी,
लेकर आया हूं मैं मन की मुंह ज़ुबानी।
क्या खोया क्या पाया हूं कहूंगा अपनी सारी बात,
मेरी बातों को रखना अपने दिल के पास।
कैसे खिली सुबह और कैसे ढल गई मेरी शाम,
क्या अब भी है उसको मुझसे प्यार।
दिल की सड़कों पर उसने जो वक्त बिताएं,
क्या अब भी है राज़ी चलने को मेरे साथ।
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है,
जो उसकी बाहों मैंने दुनिया भुला दिया आज दिल भी अपना नहीं लगता है।
कुछ मुश्किलों में फस गए तो कहीं से निकल गए,
आवाज़ में भी उसके क्या जादू था हम उसकी हर मुस्कुराहट पे फिसल गए।
रंगों ने कैसे-कैसे कमाल दिखाएं,
एक के बाद के फिज़ाओं में घुल के बारिश से को टकराए तो अलग ही रूप दिखाएं।
कैसे-कैसे लोग मेरी ज़िन्दगी में आए,
मेरी मुस्कुराहट को खूबसूरत बोल मेरे दुखी होने से रात को चैन से सो पाए।
कुछ कहानियां ख़तम हो रही तो कुछ शुरू हो रही,
कोई दीवाना कहेगा तो कोई पागल।


                         By— Pradeep Yadav

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