ये सोचा है!

तुम मेरे बिना ही जादा खुश हो...
तो शिक़ायत कैसी???
अब मै तुम्हे खुश भी ना देखू...
तो फिर मोहब्बत कैसी???
इश्क़ में इज़हार पहले किया तो...
हवस का पुजारी???
और वक्त को मोहताज समझा तो...
वो किसी और कि???
अब किसी और से क्या मोहब्बत करू???
इन दिनों खुद से कम नफ़रत करू...
ये सोचा है!!



                          By— Pradeep Yadav

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